VARANASE: मान मंदिर महल की खासियत, जिसकी ओर खिंचे चले आए पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मानमंदिर घाट पर स्थित मानमंदिर महल में शानदार हाईटेक वर्चुअल म्यूजियम (आभासी संग्रहालय) का अवलोकन किया…
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वाराणसी:[ AVANTIKA MALIK ].प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मानमंदिर घाट स्थित मानमंदिर महल में शानदार हाईटेक वर्चुअल म्यूजियम (आभासी संग्रहालय) का अवलोकन किया। इस वर्चुअल म्यूजियम के माध्‍यम से काशी के बारे में प्रधानमंत्री और डिजिटल तरीके के अवगत हुए। इस संग्रहालय में प्रधानमंत्री करीब आधे घंटे तक रहे और अपने संसदीय क्षेत्र की प्राचीन विशेषताओं से अवगत हुए।

3डी म्यूरल का जलवा

गंगा किनारे मान मंदिर घाट पर मान महल और वेधशाला में हो सकता है आप अब तक सैकड़ों बार इस धरोहर को निहार चुके हों, लेकिन इस बार आप जब मान महल में प्रवेश करेंगे तो अतीत से वर्तमान तक का बनारस आप के इदगिर्द होगा। पक्के महाल का जायजा लेने के लिए आप को घंटों गलियों में पैदल चलना होता है, लेकिन आप मान महल में खड़े रहेंगे और गली चलती जाएगी। आप को यह अनुभूति मान मंदिर महल में बनाए गए शानदार हाईटेक वर्चुअल म्यूजियम (आभासी संग्रहालय) में होगी। उत्तरी प्रवेश द्वार से प्रवेश करते ही सामने दीवार पर बनारस के घाटों का विहंगम दृश्य उपस्थित करने वाला थ्री-डी म्यूरल दिखेगा। इस म्यूरल को प्रसंग के अनुरूप रंगीन एलईडी से सजाया गया है।

जबकि, दरवाजे के बाईं ओर पौराणिक काशी का मानचित्र दाहिनी ओर डेढ़ फुट चौड़ी और तीन फुट लंबी स्क्रीन पर शिवलिंग के दर्शन होंगे। लॉबी में दाहिनी ओर अर्द्धचंद्राकार बनारस की प्रतीक स्क्रीन लगाई गई है। करीब बीस फुट लंबी और साढ़े तीन फुट चौड़ी इस स्क्रीन पर पांच मिनट की शॉर्ट फिल्म के जरिए बनारस के हजारों वर्ष पुराने इतिहस से वर्तमान तक की चर्चा होगी। इस दौरान स्क्रीन पर काशी की महान विभूतियों, पुरातात्विक, ऐतिहासिक और धामिक स्थलों की तस्वीरें भी उभरेंगी। यहां से बढ़ते ही आप बनारस की गलियों में पहुंच जाएंगे। घर के दरवाजे के बाहर चौतरे पर बैठकर शतरंज खेलते बुजुर्गों का चित्र इस अंदाज में सजाया गया है कि महसूस होगा कि आप उनके बगल में खड़े हैं।

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पैदल चाल से गली आगे बढ़ती जा रही
चंद कदम आगे नया आयाम खुलेगा, यहां पांच फुट चौड़ी और तकरीबन तीस फुट लंबी स्क्रीन पर बनारस की मशहूर गलियों का पहले से रिकॉर्ड वीडियो चल रहा होगा। चहलकदमी करने वाले अंदाज में शूट किए वीडियो प्ले होने के दौरान स्क्रीन के सामने खड़े होने पर आप को आभास होगा कि पैदल चाल से गली आगे बढ़ती जा रही है। इस गली की नुक्कड़ पर एक पानवाला आप की खिदमत में बैठा दिखेगा। पान की इस दुकान पर पान वाले की प्रतिकृति को छोड़ दुकान की सजावट, उसमें रखी सामग्री सबकुछ आभासी है। पान की चौकी की जगह लगी फ्लैट स्क्रीन पर आप पान लगाने के तरीके का अवलोकन भी कर सकते हैं।

पीएम ने किया था लोकार्पण
मानमंदिर महल में नेशनल सेंटर ऑफ साइंस (एनएसएस) की ओर से विकसित उत्तर प्रदेश के पहले आभासी संग्रहालय का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल 21 जनवरी को किया। पीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को एनएसएस ने दस से अधिक सेक्शन में तैयार किया है। प्रत्येक सेक्शन के लिए ऑपरेटर, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के नियमित देखरेख के लिए टेक्नीशियन की तैनाती है।

काशी के खगोलविदों को प्रायोगिक धरातल
सर्व विद्या की राजधानी काशी के खगोलविदों को प्रायोगिक धरातल की सौगात देने के लिए राजस्थान की राजधानी जयपुर के संस्थापक सवाई राजा जय सिंह ने सन् 1734 के आस-पास मान महल वेधशाला का निर्माण कराया। वेधशाला दशाश्वमेध घाट के निकट गंगा के पश्चिमी तट पर उसी आलीशान महल के दूसरे तल पर है जो आमेर (राजस्थान) के राजा तथा राजा जय सिंह के पुरखे महाराजा मान सिंह ने सन् 1600 में बनवाया था। राजस्थानी वास्तु शिल्प की नायाब कारीगरी की मिसाल बलुआ पत्थरों से निर्मित मान महल तो अपने आप में बेजोड़ है ही, वेधशाला के संयोग ने इस कृति को और वैभवशाली बना दिया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (सारनाथ मंडल) द्वारा संरक्षित यह धरोहर आज काशी के मान बिंदुओं में से एक है।

सवाई राजा जय सिंह ने निर्माण कराया
सर्व विद्या की राजधानी काशी के खगोलविदों को प्रायोगिक धरातल की सौगात देने के लिए राजस्थान की राजधानी जयपुर के संस्थापक सवाई राजा जय सिंह ने सन् 1734 के आस-पास मान महल वेधशाला का निर्माण कराया। वेधशाला दशाश्वमेध घाट के निकट गंगा के पश्चिमी तट पर उसी आलीशान महल के दूसरे तल पर है जो आमेर (राजस्थान) के राजा तथा राजा जय सिंह के पूर्वज महाराजा मान सिंह ने सन् 1600 में बनवाया था। राजस्थानी वास्तु शिल्प की नायाब कारीगरी की मिसाल बलुआ पत्थरों से निर्मित मान महल तो अपने आप में बेजोड़ है ही, वेधशाला के संयोग ने इस कृति को और वैभवशाली बना दिया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (सारनाथ मंडल) द्वारा संरक्षित यह धरोहर आज काशी के मान बिंदुओं में से एक है।

ज्योतिषी ने शुरू कराया था वेधशाला का निर्माण 
अभिलेखों में दर्ज सूचनाओं के अनुसार इस योजना को जमीन पर उतारने में प्रमुख भूमिका समर्थ जगन्नाथ की थी जो स्वयं एक दक्ष ज्योतिषी थे। काम जयपुर के स्थापत्यकार मोहन द्वारा सरदार सदाशिव की देख-रेख में संपन्न हुआ। 19वीं शताब्दी तक वेधशाला ध्वस्त हो चुकी थी। सन 1912 में जयपुर के तत्कालीन राजा सवाई माधो सिंह के आदेश पर वेधशाला का जीर्णोद्धार हुआ। उस समय के प्रंबधकारों में लाला चिमनलाल दारोगा, चंदूलाल ओवरसीयर, राज ज्योतिषी पं. गोकुलचंद तथा भगीरथ मिस्त्री के नाम वेधशाला की एक दीवार पर दर्ज हैं।